Monday, 29 June 2020

अटूट बंधन का अकाट्य सूत्र

मुझे जरुरत नहीं
कि
तुम रोज मुझसे कहो 
'मैं तुमसे प्यार करता हूँ'
पर जब खालीपन खल रहा हो
तो तुम्हारे ये शब्द मेरे लिए संजीवनी होते हैं!
मैं नहीं चाहती
कि तुम पूरा दिन मुझसे इज़हार में गुजार दो
पर मैं संभल जाती हूँ उस पल में
जब मैं अपने दर्द संभाल न सकूँ
और ठीक तभी तुम मुझे गले से लगा लो!
मेरी ऐसी कोई ज़िद नहीं है
24×7 तुम मेरे पल्लू से बंध कर रहो
पर जब मैं नहीं रहूँ ठीक
तो भी जी उठती हूँ
जो मेरा हाथ थामकर सिर्फ इतना कह दो 
'मेरे लिए रखो खयाल अपना!'
जानती हूँ तुम्हारे तर्क 
कि हर बात बोलना जरूरी नहीं,
बोलकर बात की अहमियत खत्म नहीं करनी है,
बोलने से ज्यादा महसूस करना मायने रखता है,
क्या बिना कहे विश्वास नहीं है मुझ पर,.
वगैरह-वगैरह
पर एक बात तुम भी समझो,
शब्द बाण सा चुभ सकता है
तो शब्द प्राण सा जीवित भी रख सकता है।
स्पर्श चोट दे सकता हैं तो स्पर्श मरहम भी बन सकता है!
एक पहलू समझ गई मैं, दूसरा तुम भी समझकर देखना!
अटूट बंधन का अकाट्य सूत्र मेरी नज़र में!

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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