कभी चाहते थे
हमारे माता-पिता
हमें समझें
हमारी इच्छाओं को महत्व दें
हमारी सुने!
अब चाहते हैं
हमारे बच्चे
हमें समझें
हमारी इच्छाओं को मान दें
हमारी सुने!
क्यों
क्या हमारे माता-पिता या हमारे बच्चे
हमसे कोई अपेक्षा रखने का अधिकार नहीं रखते?
क्यों न कभी तो हम चुप रहकर सबकी सुने?
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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