किसी रात
उजाले में खड़े होकर देखना
सामने सिर्फ घना अंधेरा दिखता है
कौन कहता है
कि सफल व्यक्ति निराश नहीं हो सकता?
ये बात और है
कि हम-तुम जैसे
खुलकर हँस-बोल और रो नहीं सकता,...!
भरे मन से चैन की नींद सो नहीं सकता,.!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना
copyrights protected

0 comments:
Post a Comment