ये ज़मीं
माँ सी लगती है
देती है अन्न,
वस्त्र
और निद्रा अपनी गोद में!
ये आसमाँ
पिता से लगता है
देता है जल, धूप, वायु
अन्न-वस्त्र-आवास की उत्पत्ति के लिये
रहता है सिर पर साये की तरह!
ये ज़मीं- ये आसमाँ
दो शाश्वत ध्रुव जीवन के,..!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना
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