Wednesday, 17 June 2020

ये ज़मीं- ये आसमाँ

ये ज़मीं
माँ सी लगती है
देती है अन्न, 
वस्त्र 
और निद्रा अपनी गोद में!

ये आसमाँ
पिता से लगता है
देता है जल, धूप, वायु
अन्न-वस्त्र-आवास की उत्पत्ति के लिये
रहता है सिर पर साये की तरह!

ये ज़मीं- ये आसमाँ
दो शाश्वत ध्रुव जीवन के,..!

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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