रुखापन और रीतापन देख-देख कर रिश्तों में बहा नहीं गया हमसे,
इस बार मन के मरुथल को भिगोता अश्रुजल पीया नहीं गया हमसे,
प्यास है अब की बार मन को भीतर तक भावों से भीग जाने की,
परिणाम, समाधान, विकल्प और हल बनकर जिया नहीं गया हमसे।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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