अंधेरा तभी भागता है जब उम्मीद का कोई दीप जलता है,
सृष्टि में सूरज भी असमय नहीं, सुबह के साथ खिलता है,
जीवन जीना भी कला है, जो सिखाता है समय ही समय के साथ,
सुकून बाहर कहीं भी नहीं है, अपने ही अंतस में पलता है।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना
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सटीक और सही
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