Sunday, 14 June 2020

शहर की रात



पुरसुकून नींद
चांदनी रात
गांवों की गलियों में
बिछी हुई खाट
खो गई ऐसी
गांवों की रात
और
शहर की रात
न सुकून, न नींद
न चाँद दिखता न सितारे
सड़कों पर फैले हैं
दहशत भरे सन्नाटे
और अचानक दूर से आती
गाड़ियों का शोर
दूर तक रास्ते अजनबी
न कोई मंजिल
न कोई ठौर,..!

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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