पुरसुकून नींद
चांदनी रात
गांवों की गलियों में
बिछी हुई खाट
खो गई ऐसी
गांवों की रात
और
शहर की रात
न सुकून, न नींद
न चाँद दिखता न सितारे
सड़कों पर फैले हैं
दहशत भरे सन्नाटे
और अचानक दूर से आती
गाड़ियों का शोर
दूर तक रास्ते अजनबी
न कोई मंजिल
न कोई ठौर,..!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



0 comments:
Post a Comment