Friday, 1 May 2020

प्रेम (मिनी कहानी)

प्रेम


वह दरवाजे के पास खड़ी थी

मैं खिड़की के पास खड़ा था

          निहारते रहे बहुत देर तक एक दूसरे को, लेकिन दोनों का ही 'मैं' बहुत बड़ा था।

अचानक गली में किसी के चीखने की आवाज सुनाई दी।

         वो दौड़ी क्योंकि वो दरवाजे के ही पास थी, डॉ होने का दायित्व निभाते हुए घायल वृद्ध को प्राथमिक चिकित्सा दी।

         मैं पहुंचते ही गाड़ी वाले की दिशा में अपनी बाइक उठाकर भागा ताकि दोषी को सजा दे सकूँ। पर वह हाथ से निकल गया।

         उत्तरदायित्व ने हम दोनों को आवाज़ दी पर समय और भाग्य सबका अपना-अपना होता है।

         आज मैंने उसका समर्पण देखकर अपना 'मैं' छोड़कर घुटनों पर आकर उसका  हाथ माँग लिया। और अपनी स्वीकृति के साथ उसने भी 'मैं' छोड़ दिया।

         उच्च कुल, गोत्र और प्रोफेशन के 'मैं' ने प्रेम के आगे घुटने टेक ही दिए।


#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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