एक एक करके
दिन बीतते रहे
सप्ताह बीते
माह बीते
बीत गए
कितने ही साल
साल बदले
सदियों में
सदियाँ
जन्मजन्मांतर में
और पल-पल
दृढ़ हुआ विश्वास
कि हम साथ है
आज नहीं जन्मों-जन्मों स
अब जीवन का अंत हो भी जाए
तो मुझे खोने के भय से मुक्ति मिल ही गई।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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