Tuesday, 5 May 2020

एक एक करके

एक एक करके
दिन बीतते रहे

सप्ताह बीते
माह बीते

बीत गए
कितने ही साल

साल बदले
सदियों में

सदियाँ
जन्मजन्मांतर में

और पल-पल
दृढ़ हुआ विश्वास

कि हम साथ है
आज नहीं जन्मों-जन्मों स

अब जीवन का अंत हो भी जाए
तो मुझे खोने के भय से मुक्ति मिल ही गई।

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

0 comments:

Post a Comment