Tuesday, 5 May 2020

#उतावलेपनकाजिम्मेदारकौन?



      बालाघाट जिला ग्रीनजोन में होने के कारण 4 मई से नियमबद्ध रहते हुए खुल जाएगा। व्यावसायिक संस्थान सुबह 9 बजे से 6 बजे तक खुलेंगे। ये सूचना आज शाम से ही प्रसारित हो रही थी, सभी व्यापारी अगले दिन दुकान खुलने की सूचना से खुश होकर साफ-सफाई और सेनिटाइजर आदि की व्यवस्था में लग गए।
       दूसरे दिन ठीक 9 बजे पूरा मार्किट ऐसे खुल गया मानो सभी की दुकानों का उद्घाटन होना हो।
       सड़कों पर बाइक, बच्चे, लड़कियाँ सभी यूँ घूमने निकले वारासिवनी गाँव नहीं अपितु कोई दर्शनीय स्थल हो। दुकानों पर भीड़ बढ़ने लगी। दो-चार-दस फिर बस किसी को ध्यान ही नहीं कि ग्राहकों ने हाथ धोए, सेनिटाइजर लगाया, नोट सेनिटाइज़ किये बिना ही गल्लों में जाने लगे। शाम तक तो सभी भूल गए कि क्या सावधानी बरतनी है या अपनी सुरक्षा का दायित्व सरकार ने हम पर डालकर व्यवसाय की अनुमति दी थी।
        मन मार कर 6 बजे ही दुकान बंद करके सभी घरों में पहुंचे ही थे कि टीवी चालू कर लिया।
        2-4 मिनट बाद ही समाचार आया कि बालाघाट जिले से लगी छत्तीसगढ़ बार्डर पर हैदराबाद से लौट रहे श्रमिकों में से 6 श्रमिक कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं। बार्डर के 3 गाँव सील कर दिए गए हैं। संभावना जताई जा रही है कि जिस जगह इन्हें क़वारेन्टीन के लिए रखा गया था उसके आसपास के लोगों या बैहर के उन लोगों की जाँच करवाई जा रही है जो उन यात्रियों के संपर्क में आए।
        दुकान खोलने का उतावलापन और दिनभर की थकान एक ही पल में तनाव में बदल गई।
       घर के बाहर मित्रों की टोली में भी यही चर्चा का विषय था, यार सरकार ने जल्दी कर दी, कम से कम 30 तक तो लॉक डाउन रहना चाहिये था, जैसे डेढ़ माह वैसे 2 माह। अब तो दिन भर डर-डर के रहो।
        और ये बात उसने कहीं जो रोज कलेक्टर के पास ग्रीनजोन में व्यापार की अनुमति की अर्जी लगाने वाली भीड़ के प्रमुख लोगों में शामिल था।
        यानि एक बार फिर गलत तो सरकार ही है, जनता को महामारी की गंभीरता हर तरह से, हर माध्यम से समझाने और पूरे प्रशासन की कड़ी मेहनत, सेवाकर्मियों की मेहनत, सरकारी  कर्मचारियों के समर्पण के बाद उतावलेपन की लापररवाही का जिम्मेदार कौन?
सरकार या जनता?
इस सवाल पर पूरी भीड़ मौन?
मानसी कल से ये सब देखती-सुनती रही पर नर्वस ब्रेकडाउन के काण आज बिस्तर पर है, इसका जिम्मेदार कौन?

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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