दर्द गूँजता रहता है
दिल के इक भीतर शोर है
भीगी आँखों की कोर है
दर्द गूँजता ही रहता है
उलझी सांसों की डोर है
मुस्कान बड़ी बेइमान है
मन का पंछी कमजोर है।
मेरी बातें मुझसे ही छुपाए
दिल में रहता कोई चोर है।
जाने मन किसमें अटका है
चलता नहीं कोई जोर है।
अंधेरा बहुत गहन हुआ अब
शायद होने को भोर है।
आहट खुशियों की आए
तो नाचे मन का मोर है।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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