Tuesday, 12 May 2020

दर्द गूँजता रहता है

दर्द गूँजता रहता है

दिल के इक भीतर शोर है
भीगी आँखों की कोर है

दर्द गूँजता ही रहता है
उलझी सांसों की डोर है

मुस्कान बड़ी बेइमान है
मन का पंछी कमजोर है।

मेरी बातें मुझसे ही छुपाए
दिल में रहता कोई चोर है।

जाने मन किसमें अटका है
चलता नहीं कोई जोर है।

अंधेरा बहुत गहन हुआ अब
शायद होने को भोर है।

आहट खुशियों की आए 
तो नाचे मन का मोर है।

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

0 comments:

Post a Comment