अभी कल की ही बात थी
मैं और तुम
हाथ थामे चले थे अनंत यात्रा पर,..!
ये
यात्रा सुगम थी
पर पथ दुर्गम
लक्ष्य निश्चित
अनंत काल का
दिन बीत गया तो क्या हुआ?
अभी रात है तो क्या हुआ?
दिखते नहीं साथ तो क्या हुआ?
मैं और तुम
धरा और गगन
कल भोर फिर दिखेंगे
सबको क्षितिज पर मिलते
भोर से सांझ तक
पर रहेंगे साथ सदा
भूलना मत
ये यात्रा अंनत कालीन है,..!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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