मीठी होती है मुसकानें,
क्यों पीता है आँसू खारे।
तूने तो कितना पाया है,
कुछ तो हैं तनहा बेचारे।
तूने सिर पर छत पाई है,
डगर-डगर फिरते बंजारे।
आँख न होती कुछ लोगों की,
तुम तो गिन सकते हो तारे।
सब कुछ मिल सकता है सबको,
कोशिश कब करते हैं सारे।
कुछ लोगों की बात अलग है,
बेमतलब सड़कों पर नारे।
मत जी ऐसे मन को मारे,
मन में दुविधा मत रख प्यारे।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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