मन करता मनमानी, बात मेरी न मानी।
खुशियाँ थी चहुओर
शान्ति से आवरित,
सूरज के जाते ही
आसमान मन हुआ धानी।
मन करता मनमानी,बात मेरी न मानी।
दूर क्षितिज में
खिलता है इंद्रधनुष
मन में तुम्हारी याद
आंखों में निदिया रानी।
मन करता मनमानी, बात मेरी न मानी।
रात आई, सितारे चमचमाए
पर जीवन मानो ठहर गया
सूरज के आते ही फिर
स्वप्न ने पूर्णता की ठानी
मन करता मनमानी, बात मेरी न मानी।
डर प्रीति समकित सुराना



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