Wednesday, 29 April 2020

जीवन जीना एक कला है



कभी जोकर को देखा है
मसखरी करता वही जोकर
असलियत में मिल जाए
तो पहचानना मुश्किल होगा
उसके दर्द वो ही जाने
चित्रकार प्रकृति को नहीं
जीवन को तूलिका से जीवंत करता है
संत प्रवचन और अध्यात्म में रमता है
दुराचारी दुष्कर्म की लाठी के सहारे जीता है
गरीब भूख से मर न जाए इसलिए खाता है
अमीर दिखावे में ही जीवन बिताता है
गायक संगीत में डूब जाता है
और नर्तक नृत्य में दुख को विसर्जित करता है
लेखक सर्वस्व समर्पित भावों को लेखन के माध्यम से
अभिनेता अभिनय में गुम हो जाता है
यानि 
हर जीव जीवन जीने के लिए कोई न कोई किरदार निभाता है
ये इस बात को दर्शाता है
कि
ये जीवन एक रंगमंच है 
और हम सब उस मंच के कलाकार
इसीलिए तो कहते हैं
जीवन जीना एक कला है।
है न!

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

1 comment: