क्या है जिसको छुपाते हो
सच क्यों नहीं बताते हो
मन में पीड़ा रखकर अपनी
दिल मेरा भी दुखाते हो
नम आँखें मैं पढ़ लेती हूँ
झूठी खुशियाँ जताते हो
रो लो जी भर आँखों से
मन को क्यों यूँ रुलाते हो
भ्रम के कितने लगे हैं जाले
क्यों नहीं इनको हटाते हो
ऐसा करके अच्छा क्या है
मुझको भी तो सताते हो
सब सुनती हूँ अनकहा भी
जब मुझसे आँख चुराते हो
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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