Monday, 27 April 2020

मुझसे आँख चुराते हो

क्या है जिसको छुपाते हो
सच क्यों नहीं बताते हो

मन में पीड़ा रखकर अपनी
दिल मेरा भी दुखाते हो

नम आँखें मैं पढ़ लेती हूँ
झूठी खुशियाँ जताते हो

रो लो जी भर आँखों से
मन को क्यों यूँ रुलाते हो

भ्रम के कितने लगे हैं जाले
क्यों नहीं इनको हटाते हो

ऐसा करके अच्छा क्या है
मुझको भी तो सताते हो

सब सुनती हूँ अनकहा भी
जब मुझसे आँख चुराते हो

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

0 comments:

Post a Comment