तप के उपवन में जीवन
कमल सरीखा खिलता है,
यह पुण्य योग भी जीवन में
किसी-किसी को मिलता है
आसान नहीं होता है रखना
वश में अपनी जिव्हा को
और तो और नियम न हो तो
मन भी बहुत मचलता है।
धन्य-धन्य है मम्मी मेरी
कितने सारे तप कर डाले
और धन्य हुए हम सब
पुण्य मिले हमको भी सारे।
अक्षयनिधि, समवसरण,
विजय कषाय, नवपद ओली
बीसस्थानक, ज्ञान पंचमी
तपोमय है मम्मी की झोली।
ज्ञान पंचमी, मौन ग्यारस
चैत्री पूनम, कार्तिक पूनम
याद करें हम और क्या-क्या
श्रद्धा से हुई आंखें नम।
अठाई और अट्ठम तप
नौ उपवास, अष्टापद ओली
सब कुछ करके मम्मी ने
फिर अपना वर्षीतप झेली
आज हर्ष का अवसर आया
भाव न मन में हमारे समाया
आज पारणा वर्षी तप का
संग-संग पूरा परिवार हरषाया।
हम सब बच्चे और बड़े
करते है अनुमोदना आज।
सुखसाता का भाव लिए
हो आपके मन के पूरे काज।



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