Wednesday, 3 January 2018

प्रेम तलाशता *मेरा मन*

*मेरा मन*

चहुँ ओर

ईर्ष्या-द्वेष
छल-कपट
झूठ-फरेब
संदेह-कलह
दंभ-आक्रोश
आरोप-प्रत्यारोप
प्रतिद्वंदिता-प्रतिस्पर्धा

इन सब के बीच
कतरा-कतरा
विश्वास-अपनापन
कर्तव्यपरायणता-समर्पण
और
प्रेम तलाशता

*मेरा मन*

प्रीति सुराना

5 comments:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार ८ जनवरी२०१८ के ९०३ वें अंक के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  2. विकृतियों से भरे यथार्थ के धरातल पर प्रेम की तलाश सचमुच एक अबूझ पहेली जैसी है।
    बधाई एवं शुभकामनाएं। लिखते रहिए।

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  3. आपको सूचित करते हुए बड़े हर्ष का अनुभव हो रहा है कि ''लोकतंत्र'' संवाद ब्लॉग 'मंगलवार' ९ जनवरी २०१८ को ब्लॉग जगत के श्रेष्ठ लेखकों की पुरानी रचनाओं के लिंकों का संकलन प्रस्तुत करने जा रहा है। इसका उद्देश्य पूर्णतः निस्वार्थ व नये रचनाकारों का परिचय पुराने रचनाकारों से करवाना ताकि भावी रचनाकारों का मार्गदर्शन हो सके। इस उद्देश्य में आपके सफल योगदान की कामना करता हूँ। इस प्रकार के आयोजन की यह प्रथम कड़ी है ,यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। आप सभी सादर आमंत्रित हैं ! "लोकतंत्र" ब्लॉग आपका हार्दिक स्वागत करता है। आभार "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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