Tuesday, 15 November 2016

अंतरा

सुनो!

*मैंने अंतरा में कहा*
सब प्रेम पर लिखो
सब ऐसे गायब हो गए
मानो कालाधन कितना है
ये पूछ लिया हो मैंने,..

पर मैंने आज खूब लिखा
हमारे प्रेम पर
अभी अभी सबक सीखा
चोरी से छुपाया कालाधन
एक दिन निकालना ही पड़ता है

पर सोच लिया है मैंने
इसे सबसे छुपाकर
कालेधन की तरह नहीं रखूंगी
अब दुनिया जाने तो जाने
हमारा प्यार भले ही सबको खटके

लो कर दिया घोषित
मैंने जो सबसे छुपा रखा था
*तुम ही मेरा प्यार*
तुम ही मेरा संसार
और तुम ही मेरी पूंजी,... प्रीति सुराना

0 comments:

Post a Comment