Wednesday, 3 August 2016

हे मन

हे मन मुझको दे ऐसा कोई प्रतिबोध,
हो जाए मेरी आत्मा को भी शक्तिबोध

हो जाने अनजाने मुझसे कोई भूल
मेरा आचरण करे भूलों का अवरोध

और सदा सत्य का हो जीवन में अनुसरण
सत्य की औषधि से हो पापों का प्रतिरोध

राष्ट्र जागरण धर्म हमारा रख ये याद
मन में न रहे अब तो कोई भी प्रतिशोध

देशभक्ति लहू में ही घुलमिल जाए 'प्रीत'
मन तुझसे मेरा है एक यही अनुरोध ,...प्रीति सुराना

1 comment:

  1. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 05/08/2016 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

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