Sunday, 24 April 2016

धरती मां को

अपने खेतों को सींचा था उसने खून पसीने से,
धरती मां को रोज लगाया उसने अपने सीने से,
सूखा सूखा मौसम आया प्यासी थी धरती मां भी,
भूखा कुनबा लेकर मरना सरल लगा यूं जीने से।।
प्रीति सुराना

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