Thursday, 21 April 2016

क्षितिज पर रोज मिलेंगे

हरदम हरपल साथ रहेंगे हम दोनों,
सुखदुख सारे साथ सहेंगे हमदोनों,..

ले हाथों में  हाथ नही भी चल पाएं,
कदम मिलाकर साथ चलेंगे हम दोनों,..

दौर कठिन जीवन में कोई आ जाए,
हालातों से साथ लड़ेंगे हम दोनों,..

सोच लिया है साथ हमें तो चलना है,
होनी से भी अब न डरेंगे हम दोनों,..

मिलना और बिछड़ना बस की बात नहीं,
जो भी हो स्वीकार करेंगे हम दोनों,...

झुकता है आकाश जहां इस धरती पर
"प्रीत" क्षितिज पर रोज मिलेंगे हम दोनों,... प्रीति सुराना

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