Wednesday, 27 November 2013

गांव की लड़की

शहर की चौड़ी सपाट सड़कों में हादसों का सफर,
पड़ोस में रहते लोगों के भी मीलों की दूरी से घर,
हवस लालच बनावटी लोगों की भीड़ आसपास,
कैसे करूं बयां शहर में ब्याही गांव की लड़की का डर,....प्रीति सुराना

6 comments:

  1. शानदार और जानदार कविता

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  2. कल 28/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  3. उम्दा है |सच में शहर में तो अच्छे अच्छे लोग परेशान हो जाते हैं वह तो गाँव की लड़की ठहरी |

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  4. बहुत सार्थक और सटीक अभिव्यक्ति...

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