Sunday, 30 June 2013

अरमानों के बसेरे,

धरती और अंबर के बीच 
कुछ अधूरी इच्छाएं बिखेरे,

मन में हर पल कुछ पाने 
या खोने की कशमकश के घेरे,

कहीं सूरज के उजाले में 
पंछियों की चहक सबेरे सबेरे,

वहीं चांद और सितारों की 
आड़ में दुबके हुए अंधेरे,

दिल और दिमाग के बीच 
कुछ अनसुलझे सवालों के फेरे,

कहीं खुशियों का रेगिस्तान 
वहीं गमों के बादल घनेरे,

इन्ही सब के बीच कंही 
इंद्रधनुषी अरमानों के बसेरे,

मानों सृष्टि ने फैला रखे हों 
कण कण में "सपनों के डेरे",.......प्रीति सुराना

10 comments:

  1. आप बहुत अच्छा लिखती हैं ,जो भी लिखती है दिल को छु जाती है । सुन्दर रचना ,,,बधाई

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  2. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ....शुभकामनायें ....

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  3. आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा कल सोमवार [01.07.2013]
    चर्चामंच 1293 पर
    कृपया पधार कर अनुग्रहित करें
    सादर
    सरिता भाटिया

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  4. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ....शुभकामनायें ....

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  5. अत्यंत भावपूर्ण प्रस्तुति. बहुत बधाई और शुभकामनाएँ.

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  6. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुती आभार ।

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  7. मन को छू लेने वाली अभिव्यक्ति...बहुत खूबसूरत....शुभकामनाएं

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  8. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति
    शुभकामनायें

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  9. बहुत ही शानदार रचना..

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