Sunday, 16 September 2012

मजबूर है हम


मशरूफ या मगरूर नहीं,...मजबूर है हम
वरना तुझसे मिलने रोज आते,
हमारे गम से कहीं,..तेरा दिल न दुखे
इसलिए तुझे वजह नही बताते,..........प्रीति

7 comments:

  1. कल 30/09/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    1. apka bahut bahut abhar yashwant ji,..

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  2. सुन्दर रचना

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