Friday, 14 September 2012

वाह रे महंगाई,..


सबसे पहले मैं,...

फिर मेरे सपने
कैसे देखूं सपने
मुझसे मंहगे,..
मेरे सपने,

जो पूरे कर भी लूं सपने
तो कैसे मनाऊं खुशियां
मेरे सपनों से महंगी,...
मेरी खुशियां,

जो हो भी जांऊ खुश
कैसे बांटू मिठाई,
मेरी खुशियों से मंहगी,...
मिठाई,

वाह रे महंगाई,...प्रीति सुराना

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