Friday, 20 July 2012

'लोचन'


ममतामयी मां के 'चक्षु' से 
अविरल आज नेह बहे,
भरकर आंसु 'आंखों' में 
बाबुल  दे रहे आशीष तुझे ,
भीगे 'नेत्र' छुपाकर भैय्या 
आज दे रहा तुझे विदाई,
'ऩयनो' में सपने लेकर 
नवजीवन में तेरे कदम बढ़े,
सुंदर सजल 'लोचन' से 
न अब तू यूं नीर बहा,
साजन के संग जा सखी 
तुझे एक नया संसार मिले.....प्रीति

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