Monday, 7 May 2012

छू लूं आसमा


ये हसरत कि पैरों तलें जमीं हो 
और मैं उचककर छू लूं आसमा,.......
जब भी सजाया मैंने ये सपना तो 
अपना कद मुझे बहुत छोटा लगा,....

जमीन पर रखकर कब्जा अपना 
शिखर तक जाना मुमकिन लगा,.....
पर ये भी मेरे नाजुक कदमों को 
अपने लिए बहुत मुश्किल लगा,.....

और जो इरादा आजाद परिंदे सी 
उड़ती फिरूं मैं और आसमा छू लूं
जमीं को गुलाम रखकर अपना 
आजाद होना नामुमकिन लगा,......प्रीति

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