Monday, 7 May 2012

प्यार किए तो मुझे सालों बीते


कभी घबराऊं,कभी शरमाऊं
कभी तनहा बैठी कोई गीत गुनगुनाऊं
कभी  परिंदों से कर लूं बातें
कभी हवा को ही अपने किस्से सुनाऊं
कभी दर्द में भी हंस के जी लूं
कभी खुशी के लम्हों में भी आंसु बहाऊं
कभी भीड़ में उदासी साथ रहे
कभी अकेले ही बेसबब ही मुस्कुराऊं
क्या है ये क्यूं है मैं जानती हूं
पर बात ये मैं कैसे सबको समझाऊं
ढलती सांझ में कैसे सुबह की 
सुनहरी किरणों की तपिश को भूलाऊ
खूबसूरत बीती सुबह की याद में
मुस्कुराहट से शाम सजी,अब ऱात सजाऊं
गम क्यू करूं दिन के ढलने का
शाम से मिलकर रात भी खुशी से बिताऊं
प्यार किए तो मुझे सालों बीते
बस उम्र के इस पड़ाव पर यादों को दोहराऊ
कल अच्छा था इसलिए आज बेहतर है
क्यूं न इन खुशियों से कल को बेहतरीन बनाऊं,.....प्रीति

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