Tuesday, 3 April 2012

ये कैसा मेरा नसीब है


सब है मेरे पास ही,
पर ये शाम कुछ तनहा सी है,
सब कुछ है पहले जैसा,
पर कुछ तो है जो अजीब है,

बेचैनिया सी दिल में है,
कुछ तो हैं बेताबियां सी,
दूर ही है अभी गम के साये,
बस यादें कुछ करीब है,

आंखे हैं लबालब मेरी,
आंसुओं से भरी भरी,
मुस्कुराहटें कहीं खो गई,
तो ये लब जरा गरीब है,

कोई साथ न होकर भी,
है मेरे ही आसपास,
मै खुश भी हूं और उदास भी,
ये कैसा मेरा नसीब है,.........प्रीति सुराना

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