Tuesday, 27 March 2012

"अतीत" और "भविष्य"


आज एक गुब्बारे वाला
बच्चों को लुभाता हुआ
घर के सामने की सड़क के उस पार खड़ा था,
बच्चों की टोली हो गई इकट्ठी,...

उस धमाचौकड़ी ने बरबस मुझे आकर्षित किया,
और सबसे ज्यादा  मेरा मन अटका 
एक छोटी सी बच्ची पर जिसने लिए थे दो गैस से गुब्बारे,
दोनो हाथो में एक एक गुब्बारा पकड़े वो मुड़ी अपने घर की ओर,.. 

पर वो गैस के गुब्बारे ऊपर की ओर भागने को तत्पर थे,
वो नन्ही सी बच्ची कभी एक को संभालती कभी दूसरे को,
पर गैस का दबाव इतना ज्यादा था कि वो उन्हे संभाल नही पा रही थी,..,
उसके लिए मुश्किल था दोनो हाथों के खिचाव के साथ संतुलित कदम बढ़ना,..

जाने कैसे  मैं पहुंच गई मन के गलियारे में 
जंहा मैं खड़ी थी अपने हाथों मे दो गुब्बारे लिए 
जिसमें से एक पर लिखा था "अतीत" और दूसरे पर लिखा था "भविष्य"
दोनो ही भरसक मुझे खीच रहे थे अपनी तरफ और खिचाव की वजह से लड़खड़ा रहे थे मेरे कदम,..

अचानक मैं एकपल  सचमुच लड़खड़ा गई
कल्पनाओं से बाहर आई तो फिर नजर पड़ी उस बच्ची पर,
उसने दोनो गुब्बारे आपस मे बांध लिए थे
और जंहा गांठ बांधी थी वहां से जोर से पकड़ रखा था गुब्बारे की रस्सियों को,
और एकदम सधे कदमों से चल पड़ी अपने घर की तरफ,...

उसे देखकर अचानक मेरा मन एक पल में ही शांत और संतुलित हो गया,
अब मैंने अतीत के अनुभवों और भविष्य के सपनों को 
जोड़कर आज के हाथों में थाम लिया 
और वर्तमान के धरातल पर चलने लगी हूं बिलकुल संतुलित कदमों से 
अपने अनुभवों से अपने सपनो को पूरा करने की राह पर,.....
.
शुक्रगुजार हूं उस नन्ही बच्ची की 
जिसने मुझे जीवन का यह पाठ पढ़ाया,.....प्रीति  सुराना


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