तुम हिस्सा थे हमारी जिंदगी का
पौराणिक कथाओं से संस्कार,
जंगलबुक और कार्टून्स से मनोरंजन,
चित्रहार से भावों की गहराई,
शनिवार और इतवार को फिल्मों का इंतज़ार,
ठीक नौ बजे हिंदी में राष्ट्रीय समाचार,
साथ मानते हर त्यौहार,
किसी के निधन पर राष्ट्रीय शोक पर बजता सितार,
रंगोली और इतवार!
हर सुख दुख के भागीदार
और आज हज़ारों चैनल पर कोई नहीं
जो बैठकर देख सके एक साथ पूरा परिवार!
तुम बस तुम थे दूरदर्शन!
तुम्हें ढेर सारा प्यार,..
#डॉ.प्रीतिसमकितसुराना



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