गुरु
वो होते हैं
जो कर्म को दिशा बताते हैं
मार्गदर्शन करते हैं
आचार, विचार और संयम का
संतुलन सिखाते हैं
शिष्य
केवल वही बन पाता है
जो गुरु पर श्रद्धा रखकर
बिना किन्तु परन्तु के
उनकी बताई दिशा, मार्ग और निर्देशों को
शिरोधार्य कर सके।
सनद रहे
गुरु समय, वस्तु, व्यक्ति कोई भी हो
शिष्य बनने का गुण हम में होना चाहिए।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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