Saturday, 11 July 2020

ऐ आईने

मैं तुझे मानती हूँ झूठा
क्योंकि 
जब मैं हँस रही होती हूँ
तो मेरी हँसी में घुला दर्द
तुझमे दिखता ही नहीं
जबकि
मेरे आसपास कोई नहीं
एक तेरे सिवा
जो मुझे वैसे ही देख सके
जैसी मैं हूँ
फिर क्यों बनता है बेखबर
मेरी वास्तविकता से
जो मैं देखना चाहती हूँ तेरी आँखों से!

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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