अकेला वो नहीं होता
जो
अपनों से मिले दर्द से
टूटकर बिखर जाए
क्योंकि
तोड़ने के लिए ही सही
कम से कम
अपने तो हैं
अकेला वो होता है
जो
टूटे या बिखरे
तो कोई देखने वाला नहीं
संवरे और निखरे
तो साथ खुशियाँ बाँटने वाला नहीं!
खुश हूँ अपनों के बीच अपनों के साथ
क्योंकि अकेली नहीं हूँ किसी कदम पर!
"शुक्रिया अपनों"
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



0 comments:
Post a Comment