Thursday, 23 April 2020

तरस गए हैं

हम इतने बंधन में
आज़ादी के दरस गए
कुछ बादल आए
बिन मौसम बरस गए
कुछ अपने, कुछ सपने,
कुछ अरमान अधूरे हैं
जीवन में कैसे पल आए
चैनों अमन को तरस गए

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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