Wednesday, 29 April 2020

कभी कभी तो डर लगता है

बचपन से अपने लिए सुना एक शब्द
इमोशनल स्टुपिड
और माना भी की भावुकता में बेवकूफी
वो भी किसी पर विश्वास की
मैं अक्सर कर जाती हूँ
पर कभी अखरता नहीं था 
क्योंकि कभी किसी का अहित करके
अपना स्वार्थ कभी नहीं साधा
पर जब किसी ने अपना स्वार्थ साधकर
भावनाओं को मनोरोग का नाम दिया
तो क्रोध का बीज मन में पड़ा
कभी कभी तो डर लगता है
इस बीज के अंकुरण और संवर्धन के योग
किसी ऐसे वृक्ष को पनपने न दें
जिसका फल केवल विनाश होता है।
क्रोध और क्रोध के परिणाम से डरती हूँ मैं
क्योंकि ये भी मेरी ही भावनाओं का अंश है
अब चाहे ये इमोशनल स्टुपिडिटी हो या मनोरोग
सच तो सच है

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

0 comments:

Post a Comment