बचपन से अपने लिए सुना एक शब्द
इमोशनल स्टुपिड
और माना भी की भावुकता में बेवकूफी
वो भी किसी पर विश्वास की
मैं अक्सर कर जाती हूँ
पर कभी अखरता नहीं था
क्योंकि कभी किसी का अहित करके
अपना स्वार्थ कभी नहीं साधा
पर जब किसी ने अपना स्वार्थ साधकर
भावनाओं को मनोरोग का नाम दिया
तो क्रोध का बीज मन में पड़ा
कभी कभी तो डर लगता है
इस बीज के अंकुरण और संवर्धन के योग
किसी ऐसे वृक्ष को पनपने न दें
जिसका फल केवल विनाश होता है।
क्रोध और क्रोध के परिणाम से डरती हूँ मैं
क्योंकि ये भी मेरी ही भावनाओं का अंश है
अब चाहे ये इमोशनल स्टुपिडिटी हो या मनोरोग
सच तो सच है
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



0 comments:
Post a Comment