जीव पुण्य से आस्रव, संवर, बंध, निर्जरा
से मोक्ष की ओर बढ़ता है,
तप में केवल रसना पर नहीं मन पर भी अंकुश लगता है,
आपको मेरा शत-शत नमन और वर्षीतप की अनुमोदना,
तपोमय जीवन सदैव कठिनतम अनुशासन से चलता है।
अनुमोदना, अनुमोदना, अनुमोदना!
तपस्या करने वालों को धन्य धन्य, धन्यवाद।
सभी तपायस्वियों की सुख-साता की कामना सहित
डॉ प्रीति समकित सुराना
एवं
सुराना परिवार



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