एक तरफ़ा मोहब्बत
मुझे शान्ति से
तुम्हे कलह से
मुझे सुख से
तुम्हे सुख छीनने से
मुझे सृजन से
तुम्हे विनाश से
मुझे आस से
तुम्हें काश!से
मुझे रिश्तों से
तुम्हे बिखराव से
क्या हुआ जो हो मेरा ही अंश
कब तक करुं,
एक तरफ़ा मोहब्बत
और कब तक टालूं विध्वंश?
सवाल मेरा एक ही है
जवाब तुम्हें मालूम नहीं
तुम जानते हो केवल जंग-भंग
मुझे चाहिए संग-रंग।
डॉप्रीतिसमकितसुराना



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