जाने क्यों
यूँ बार-बार
मौसम का बदलना
मुझे हमेशा तकलीफ देता है😭
अभी ये हवाएँ, ये ओले, ये बारिश
मुझे विचलित कर रही है,..!
तपती दोपहरी में गर्म तवे सी जमीं पर
पड़ रहे ओलों से बढ़ने वाली उमस
अपने भीतर महसूस हो रही इस पल,
जाने किस बात पर ख़फ़ा है आसमां जमीं से,
जो फेंक रहा है पत्थरों की तरह ओले,..
और जाने किस बात पर दुखी है
जो रो भी रहा है तो जमीं के सीने से लगकर,...!
ये जमीं और आसमां का भावातिरेक
मुझे करता है पूरी तरह प्रभावित
मानो मैं खुद प्रकृति हूँ,...!
और मेरे ही हिस्से हैं
ये जमीं, ये आसमां, ये गुस्सा, ये ऑंसू,
तभी तो दर्द की हिलोरे मेरी धड़कनों में उठती है,..!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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