Thursday, 30 July 2015

तारों से सपने,..

टिमटिम करते
तारों से सपने,...
लुक छिप जाते
तारों से सपने,...
जिन सपनों को
मैं जीती हूं,..
अपने चन्दा को प्यारे
तारों से सपने,..प्रीति सुराना

1 comment:

  1. आप की लिखी ये रचना....
    रविवार 02/08/2015 को लिंक की जाएगी...
    http://www.halchalwith5links.blogspot.com पर....

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