Wednesday, 18 February 2015

लापरवाह


सुनो!!!

तुम लापरवाह हो,..
यही सोचकर 
मैं हरदम करती रही 
परवाह तुम्हारी,..

पर अब लगता है,..

मैं हरदम करती रही
परवाह तुम्हारी,..
इसीलिए
तुम इतने लापरवाह हो,.. 
frown emoticon
 प्रीती सुराना

8 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (20.02.2015) को "धैर्य प्रशंसा" (चर्चा अंक-1895)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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