Sunday, 28 September 2014

हां ! मुझे दर्द होता है,..

हां ! मुझे दर्द होता है,..

जब तुम मुस्कुराते हो 
पर नजरें चुराकर,..
जब तुम रोते हों 
मेरी बाहों में आकर,..


हां ! मुझे दर्द होता है,..

जब तुम बातें छुपाते हो 
बातें बनाकर,..
जब तुम सब  जताते हो 
कुछ न बताकर,..


हां ! मुझे दर्द होता है,..

जब मुझे आवाज देते हो 
खामोश रहकर,..
जब तुम तनहा से रहते हो 
मेरे साथ होकर,.. 


हां ! मुझे दर्द होता है,..

जब तुम खुद को सज़ा देते
मुझसे खफ़ा होकर,..
जब प्यार नहीं है तुम्हे मुझसे
ये बात कहते हो,....मुझे सीने से लगाकर,.....

हां ! मुझे दर्द होता है,..प्रीति सुराना

4 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवार के - चर्चा मंच पर ।।

    ReplyDelete
  2. पारस्परिक प्रेम की गहराई को दिखाती यह रचना बहुत ही भावपूर्ण है। बहुत अच्छा प्रयास। स्वयं शून्य

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    अष्टमी-नवमी और गाऩ्धी-लालबहादुर जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    --
    मान्यवर,
    दिनांक 18-19 अक्टूबर को खटीमा (उत्तराखण्ड) में बाल साहित्य संस्थान द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय बाल साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
    जिसमें एक सत्र बाल साहित्य लिखने वाले ब्लॉगर्स का रखा गया है।
    हिन्दी में बाल साहित्य का सृजन करने वाले इसमें प्रतिभाग करने के लिए 10 ब्लॉगर्स को आमन्त्रित करने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी गयी है।
    कृपया मेरे ई-मेल
    roopchandrashastri@gmail.com
    पर अपने आने की स्वीकृति से अनुग्रहीत करने की कृपा करें।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
    सम्पर्क- 07417619828, 9997996437
    कृपया सहायता करें।
    बाल साहित्य के ब्लॉगरों के नाम-पते मुझे बताने में।

    ReplyDelete