Tuesday, 23 July 2013

आया सावन झूम के

कुण्‍डलिया( मात्रिक विषम छन्‍द)

आया सावन झूम के,तेज हुई बरसात,
काटे भी कटती नही,तुम बिन अब ये रात,
तुम बिन अब ये रात,कटे कैसे बतलाओ,

बिना किये कुछ बात,नही मुझको तड़पाओ,
सुनो कहे कविराय,जिया मेरा घबराया,
आ जाओ मनमीत,पिया अब सावन आया,...प्रीति सुराना


12 comments:

  1. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 24/07/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in ....पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. बहुत बहुत सुन्दर.....
    ..... क्षणिका मन को छूती हुई...
    लाजवाब!!

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  3. उत्कृष्ट प्रस्तुति है बहना-
    बधाईयाँ-

    मेरा मन कायल हुआ, सिमटा सावन सार |
    बेल पात अर्पित करे, साजन सुने पुकार |
    साजन सुने पुकार, बहाना किन्तु बनाए |
    पाया पैसे चार , तनिक कुछ और कमाए |
    कहे सुराना प्रीति, गरजता बादल घेरा |
    मन होवे भयभीत, साथ दे साजन मेरा-

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  4. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है
    मेरा मन कायल हुआ, सिमटा सावन सार |
    बेल पात अर्पित करे, साजन सुने पुकार |
    साजन सुने पुकार, बहाना किन्तु बनाए |
    पाया पैसे चार , तनिक कुछ और कमाए |
    कहे सुराना प्रीति, गरजता बादल घेरा |
    मन होवे भयभीत, साथ दे साजन मेरा-
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति है
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें
    http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    चर्चा मंच भी देखिए।
    शायद आपका लिंक आज के चर्चा मंच पर भी हो!

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