"मेरा मन"
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Tuesday, 4 February 2020
अंधेरा मेरी पनाहगाह है
दुखों का किया
साक्षात्कार
तो बताई उसने
अपनी दुखती रग
हर किसी को नापसंद
दुख कहते हैं
चुभती है मुझे रोशनी
अंधेरा मेरी पनाहगाह है
इसलिए
मुझसे बचना है
तो खुद जलो
और रोशन करो दुनिया
दुनिया कुदरत की इबादतगाह है
प्रीति सुराना
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