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मैं जैसी हूँ वैसा ही जानो मुझे, मेरे मौलिक रुप में ही पहचानो मुझे, इंसान हूँ बुराईयाँ-अच्छाई दोनों है मुझमें, सब जान लो फिर चाहो तो अपना मानो मुझे,...!
प्रीति सुराना
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