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सूरज की किरणों ने है छेड़ा, जग में एक अनूठा राग।
जाग गए हैं लहरें और पंछी, जाग मनुज अब तू भी जाग।
वीना में सरगम के संग अब, याद प्रभु को कर ले तू भी।
सृष्टि का कण कण है जागा, जागेंगे तेरे भी भाग ।। ,.........प्रीति सुराना
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